Humesha Muskura Ke Aansuon ko Chupaya

हमेशा मुस्कुरा के आँसुओं को छुपाया,
गम को छुपाने का सिर्फ यही रास्ता नज़र आया!

किस किस को बताते बहते अश्कों का सबब,
के दर्द-ए-दिल, दिल मैं किस ने जगाया!

महफ़िलों मैं कहीं भी मज़ा ना रहा,
रखा दिल पे पत्थर तो खुद को सजाया!

बात बे बात अपनी आहें दबा कर,
यारों के दरमियाँ किस क़दर मुस्कुराया!

ना थी चाह कभी मुझे मैखानो की,
जाम-ए-वफ़ा किसी बेवफा ने पिलाया!

क्या मुक़द्दर से शिकवा करते रहें,
जो किस्मत मैं था वही तो पाया!

यह किस मोड़ पे आ गयी हैं उम्मीदें,
के साया-ए-मंज़िल नज़र मैं ना आया!

अपनो ने पलट के देखा तक नहीं,
गैरो ने आकर गले से लगाया!

अच्छा हुआ के राज़ खुल ही गया,
दिल-ए-नादान पे खंजर किस ने चलाया!!

 

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