Jaane Kya Hai Dil ke Andar Jo Toot Raha Hai

जाने क्या है दिल के अंदर जो चुपके से टूट रहा है,
एक मेहरबान का हाथ जैसे हाथों से छूट रहा है!

आँखों में अश्कों का समंदर है,
लगता है जैसे कोई पत्ता शाखों से टूट रहा है!

अश्कों को मेरी आँखों में रहने की आदत सी हो गयी है,
अब तो जैसे इश्क़ ही मुझ से रूठ रहा है!

कुछ फरमाने की गुस्ताख़ी क्या मैं भी कर सकता हूँ,
एक मासूम जज़्बात मेरे भी ज़ुबान से फूट रहा है!

पल भर का प्यार और बरसों का इंतज़ार,
जैसे कोई अपना ही अपने घर को लूट रहा है!!

Jaane Kya Hai Dil ke Andar Jo Toot Raha Hai
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