Teri Aankho Me Najar Aai Hai Jannat Mujhe

तेरी आँखों में नज़र आई है वो जन्नत मुझे,

मेरी जन्नत तेरी आँखों के सिवा कहीं नही,

चाहता हूँ बहना इन आँखों के मैखानो में,

जो नशा है तेरी आँखों में वो शराब में भी नही,

तेरे इन गुलाबी लबों पे दिल मेरा भी आया है,

नज़ाकत और खुशबू ऐसी तो गुलाब में भी नहीं,

भीगी बरसात में यूँ तेरा मुझे देखना,

जो कशिश है इन निगाहों में बादलों में भी नही,

तड़पाने और तरसाने की ये अदा कहाँ से सीखी तुमने,

ये तेरी जो है शोखियां वो तो चाँद में भी नहीं!!

Teri Aankho Me Najar Aai Hai Jannat Mujhe
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